बच्चा पहले दिन स्कूल से लौट कर बस्ता पटक कर कहता है-
“पहले क्यों नहीं बताया कि ये राग १० साल तक आलापना पड़गा?”
…
(रूस में जब बच्चा पहले दिन स्कूल जाता है तो अपने अध्यापक के लिए उपहार लेकर जाता है। इसके अलावा हर साल स्कूल शुरू होने पर और अध्यापक दिवस इत्यादि पर भी उपहार भेंट करता है।
भारत में पाँच साल के बाद स्कूल में दाखिला होता है लेकिन रूस में छः साल के बाद यानि सातवें साल में बच्चा पहनी कक्षा में दाखिला लेता है।
रूस में जब स्कूल (10वीं, 11वीं, 12वीं) का आखरी दिन होता है तो शाम को स्कूल में असली पार्टी होती है (भारत कि तरह नहीं) बच्चे (लड़के-लड़कियां) शाम को पार्टी के बाद घर लौटकर नहीं आते। सारी रात जंगल में मौज़-मस्ती (सब कुछ) करते हैं जिसे आप शादि कह सकते हैं और अगले दिन सुबह का सूरज देख कर घर आते हैं। जो लड़कियां अभी तक कुवांरी होती हैं उनमें से अधिकांश लड़कियों का शील-भंग इसी रात होता है। अगले दिन से गर्मियों की छुट्टी शुरू होती है, छुट्टियों में ये बच्चे जंगल में रहने (लैगर) जाते हैं जिसे आप हनी-मून कह सकते हैं। इस देश का नाम रसिया यूं ही नहीं है ये देश वास्तव में रसिया है।
एक बात यहां बहुत मजे की ये है कि यहां के प्राइमरी स्कूलों में चौथी कक्षा नहीं होती। शिक्षक लोग तीसरी कक्षा के बच्चो से कहते हैं कि अगर तुम ठीक से पढ़ाई करोगे तो तुम्हें हम सीधे पाँचवी में भेज देंगे। जबकि तीसरी के बच्चों को सीधे पाँचवी में भेजने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।)
May 17, 2008 at 4:22 pm
कुछ खास मज़ा नहीं आया।